Wednesday, October 15, 2008

छपास: क्या मैं काफिर हो गया हूं ?

छपास: क्या मैं काफिर हो गया हूं ?
अच्छा हो पढ ही लें, आप कुराने-पाक.
बाइबिल से भी हो सके,चिन्तन-धारा साफ.
चिन्तन-धारा साफ,कि दुनियाँ केवल उनकी.
जो ना माने उनको, बेहतर मृत्यु उनकी.
कह साधक कवि,लिखें बादमें पहले पढ लें
हिन्दू सारे कुरान को, अच्छा हो पढ लें.

गीता रामायण बचे, या फिर बचे कुरान.
मरो या मारो असुर को,कहते वेद-पुराण.
कहते वेद-पुराण, सभी अवतार बताते.
असुर मार थापहिं सुरन्ह, तुम रोज ही गाते.
कह साधक कवि,हिन्दु जगे तो बचे नारायण.
वरना ढूंढते रह जाओ गीता-रामायण.

छपास: क्या मैं काफिर हो गया हूं ?

छपास: क्या मैं काफिर हो गया हूं ?
हिन्दू चिन्तनशील है,रखता है निज तर्क.
है उदार इतना अधिक, ना समझे निज स्वार्थ.
ना समझे निज स्वार्थ,तो कैसे बच पायेगा.
दुश्मन को भाई कहता है, मर जायेगा.
कह साधक अब यथा - तथ्य हो सबका चिन्तन.
बच पाया हिन्दू तो बचेगा हिन्दू-चिन्तन.

Monday, October 13, 2008

रायटोक्रेट कुमारेन्द्र: चमत्कार हो गया सर झुकाओ

रायटोक्रेट कुमारेन्द्र: चमत्कार हो गया सर झुकाओ
गाली देना हिन्दु को फैशन बन गया आज
हिन्दु-विरोधी को सदा, रखते हैं सर-ताज
रखते हैं सर-ताज,देश-द्रोही बनकर भी
राजनीति बन गई है वैश्या,बस उनकी ही.
कह साधक कवि,बुरी बात है गाली देना.
जूते मारो उनको , कम है गाली देना .

Thursday, October 9, 2008

बार-बार आये छुट्टी, आराम मिले भरपूर.
पेपर पढना नहीं पङे,हर दिन की तरह मजबूर.
हर दिन की तरह मजबूर,कि आदत सी बन जाती.
चाय के साथ न मिले, तो उसकी याद आ जाती.
कह साधक कवि,ऐसा अवसर फिर-फिर आये.
आराम मिले भरपूर, जो छुटी बार-बार आये.

Labels:

सिन्जुर

विजय-इच्छामि

विजया दशमी के शुभ दिन आया हूँ,विजय वरूँगा.
अपनी कलम से दुष्ट-तन्त्र का निश्चित नाश करूँगा.
आपका साथ मिले पूरा,स्वीकारेंस्नेह निमंत्रण.
चाहें करें विरोध,मगर मैं पन्थ नहीं बदलूंगा .