मूल प्रश्न
बेहतर हो कि हम करें, मूल प्रश्न पर चर्चा.
यह धरती किसकी माँ है, कौन कर रहा अर्चा.
कौन कर रहे अर्चा,देकर प्राण खुशी से.
किसकी निष्ठा शक से ऊपर, कहो खुशी से.
पूछे साधक साजिद मियाँ बात बत्ताओ.
कुरान या फ़िर देश की माटी,क्या बेहतर हो?
माइकल बन गये मिकाइल,ईसा छोङ के मोमिन.
फ़र्क क्या पङा सोच लो, दोनो संवेदन-बिन.
दोनों संवेदना-हीन, विश्व को नर्क बनाते.
फ़ूहङ नाचे माइकल, मिकाईल बम्ब उङाते.
कह साधक कवि,जैसे शुम्भ-निशुम्भ हो गये.
ऎसा छोङ के मोमिन, जेक्सन माईकल बन गये.

1 Comments:
आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आने का अवसर मिला। अक्सर ग़ज़लें, छंद मुक्त कविताएं और कुछ छंद-युक्त कविताएं ही ब्लॉगों में पढ़ने को मिलती हैं। आपके ब्लॉग पर कुण्डलियां पढ़कर बहुत अच्छा लगा। विभिन्न विषयों पर सुंदर कुण्डलियां हैं।
आपको बधाई हो।
महावीर शर्मा
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