कविताओ के मन से....................: आज मेरा देश जल रहा है , कोई तो मेरे देश को बचा ले
कविताओ के मन से....................: आज मेरा देश जल रहा है , कोई तो मेरे देश को बचा ले
हजार साल से जल रही, यह इस्लाम की आग.
भारत कब से लङ रहा,अरे विजय अब जाग.
अरे विजय अब जाग, ना बुला पैगम्बर को.
देश बचाना है तो, दुत्कारो ईसा-पैगम्बर को.
कह साधक जागे प्रलयंकर शिव-शंकर अब.
भस्म करे भय-भ्रम विजयों का शिव-शंकर अब.

3 Comments:
Ati Uttam Kavirai
come to my blog
www.prakharhindu.blogspot.com new articles added
....क्योंकि मैं यह जानता हूँ कि इन तथ्यों से हमारे लोगों में केवल आत्मदया का ही संचार होगा। इतिहास में या वर्तमान में हो रहे अत्याचारों से केवल जुगुप्सा ही पैदा होगी जिससे हमारे लोगों में इस्लाम का डर और मज़बूत हो जाएगा।
क्रान्ति को तो वीर रस की ज़रूरत होती है। इसलिए हमें जो परिस्थिति, जो तथ्य आत्मदया का बोध कराए उससे दूर रहना और सम्भव हो तो मिटा देना ही अच्छा है। हिन्दुओं का क़त्ले-आम, नृशंस मुसलमानों द्वारा देश की दुर्दशा और इसी तरह के अन्य विलाप मैंने बहुत बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्रों में पढ़े हैं। पर इन से न तो हिन्दुत्व का भला हुआ न ही देश का................
जनाब, मैं आपकी सभी बातों से सहमत हूँ, लेकिन मुझे लगता है कि शायद सभी मुसलमान आतंकियों के साथ नहीं हो सकते.....हालांकि भारत में इस्लाम का परफोरमेंस काफी खराब रहा है लेकिन २० करोड़ लोगों के बारे में एकदम से क्या कहा जा सकता है। लेकिन फिर भी मैं आपकी सारी बातों का सम्मान करता हूँ, और उन्हें सही मानता हूँ। आपके विचार लगभग मेरे जैसे ही हैं। -आपका ही सचिन
सनातम धर्म सब धर्मों का आदर करता है, पर इस्लाम के अधिकाँश अनुयाई इस्लाम के नाम पर जो करते हैं उस से यही लगता है कि इस्लाम में दूसरे धर्मों का आदर करने की परम्परा ही नहीं है. या तो कोई मुसलमान है या फ़िर काफिर है. इस बात से शंका होती है कि क्या कभी मुसलमान दूसरे धर्म वालों के साथ मिल जुल कर रह सकते हैं?
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home