Tuesday, December 16, 2008

सत्यार्थमित्र: एक सच्ची बात माननीय की…

सत्यार्थमित्र: एक सच्ची बात माननीय की…
क्या करना और क्या कहते हैं, जाने क्या हो जाता.
नेता की बस बात ना पूछो,कब क्या वह कर जाता.
कब क्या वह कर जाता, देश-धर्म बिक्री कर
क्या चलता है बी.जे.पी.-काँग्रेस के भीतर.
यह साधक चकरा जाता है सोच-सोच कर.
भले व्यक्ति को क्या हो जाता, नेता बनकर.

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