Monday, December 7, 2009

रोसनी

राहुल भैया ने किया फिरसे नया कमाल.
हरदोई में उतरते, अंधकार बेहाल.
अंधकार बेहाल, रोशनी कहाँ से आये?
विज्ञ-जनोंका चिन्तन, कोई समझ ना पाये.
कह साधक अब वोट भले मिल जाये भैय्या.
सुख-शान्ति कैसे पायेंगे राहुल भैया?

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1 Comments:

At January 22, 2010 at 2:47 AM , Blogger सर्वत एम० said...

साधक जी, कुंडलिया की भी अच्छी साधना की है आपने. साधक से व्यंग्य की अपेक्षा तो नहीं थी, लेकिन 'हर फन मौला लोगों की बात ही क्या है!
आप थोड़ी साधना ब्लाग की भी करें, २०१० की पोस्ट ढूंढ कर बेहाल होने के बाद यही तय पाया कि डेरा इसी जगह डाल दिया जाए. जरा आने वाली पीढी को जल्दी जल्दी दर्शन दिया करें.

 

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