छपास: क्या मैं काफिर हो गया हूं ?
छपास: क्या मैं काफिर हो गया हूं ?
हिन्दू चिन्तनशील है,रखता है निज तर्क.
है उदार इतना अधिक, ना समझे निज स्वार्थ.
ना समझे निज स्वार्थ,तो कैसे बच पायेगा.
दुश्मन को भाई कहता है, मर जायेगा.
कह साधक अब यथा - तथ्य हो सबका चिन्तन.
बच पाया हिन्दू तो बचेगा हिन्दू-चिन्तन.

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